पंजाब 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल शिरोमणि और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन आजकल चर्चा में है कुछ लोग इसे बेमेल कह रहें हैं तो कुछ इसे दलों की राजनैतिक मजबूरी बता रहा है.
नेशनल न्यूजकॉज के सम्पादक आशुतोष पाण्डेय इस गठजोड़ का विश्लेषण कर रहे हैं
अभी पंजाब में कांग्रेस की सरकार हैं और कांग्रेस के अंदर की अंतर्कलह भी आये दिन हमें देखने को मिलती है. पंजाब विधानसभा में बसपा को 20 सीटें दी गयी हैं. 1992 में बसपा ने 9 सीटें अपने दम पर जीती थी. इस चुनाव में अकाली दल ने चुनाव नहीं लड़ा था लेकिन उसके बाद बसपा कुछ ख़ास नहीं कर पायी और उसमें कोई दमखम कभी दिखा ही नहीं.
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| फोटो: अकाली बसपा गठबंधन |
भाजपा से अलग होने के बाद से ही अकाली दल के पास कोई रणनीति नहीं दिख रही थी और किसान आन्दोलन के चलते उसे काफी नुकसान होते दिख रहा है. यहाँ हमें आम आदमी पार्टी के बारे में भी बात करनी होगी जिसने पंजाब में अपनी जमीन मजबूत की है.
आम आदमी पार्टी की सक्रियता भी अन्य दलों के लिए परेशानी का सबब बना है. 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. ऐसे समय में अकाली और बसपा का गठबंधन क्या तलाश रहा है? फिलहाल बसपा पंजाब में शिफर है. बसपा को दोआबा की कुछ सीटों पर अकाली गठबंधन का फायदा मिल सकता है. कांशीराम के समय पंजाब में बसपा का जनाधार था लेकिन कांशीराम के बाद बसपा इसे खोती गयी. पंजाब के जातिगत समीकरणों की बात करें तो यहाँ 33 फीसदी दलित आबादी है. इसी दलित आबादी पर सेंध लगा कुछ सीटें जीतने की कवायद ये गठबंधन करता दिख रहा है. ये गठबंधन अकाली दल की मजबूरी है. कांग्रेस भाजपा और आम आदमी पार्टी के त्रिकोण से भिड़ने के लिए अकाली दल के पास कोई प्लान नहीं है.
पंजाब में देश में सबसे ज्यादा दलित जनसंख्या है लेकिन पंजाब का दलित किसी पार्टी विशेष का वोट बैंक कभी नहीं रहा है विश्लेषकों के अनुसार आगामी चुनाव में भी दलित वोट बैंक का किसी एक पार्टी या गठबंधन के साथ जाने की कोई संभावना नहीं दिख रही है. लेकिन गठबंधन के जरिये अकाली कुछ दलित वोटों में सेंध जरूर लगाएगा. बसपा लम्बे समय से राजनीति में कुछ ख़ास नहीं कर पा रही है.
उत्तर प्रदेश में जहां बसपा सबसे ज्यादा जोर लगाती रही है वहां भी उसके लिए कुछ ख़ास बचा नहीं है, इसलिए उत्तर प्रदेश से बाहर बसपा को जो भी मिल जाए उसके लिए सफलता ही होगी. इस गठबंधन का नुकसान किसको और कितना होगा ये भविष्यवाणी करना अभी संभव नहीं है. लेकिन ये गठबंधन दलित वोटरों को पंजाब चुनाव की धुरी पर ले आयेगा. इस गठबंधन के चलते कांग्रेस और भाजपा के साथ आप को भी अपनी रणनीति तय करनी होगी.

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