Friday, 17 March 2017

सेक्स फंतासी या हकीकत.

सेक्स को लेकर हमारे समाज में कई भ्रांतियां हैं, जहां एक और सेक्स को आवश्यकता माना जाता है वहीं दूसरी ओर  इसे हवस से जोड़ कर देखा जाता है. इसी कारण देश में बलात्कार और यौन दुरूपयोग के मामले तेजी से बढ़ रहें हैं. टीनएजर्स में सेक्स को लेकर बढती उत्कंठा का परिणाम ही है कि युवाओं के बीच विवाह पूर्व शारीरिक संबंधों में तेजी से इजाफा हो रहा है. लिव इन रिलेशनसिप को भी सामाजिक मान्यता मिलती दिख रही है. अभी हमने 150 युवाओं से जब लिव रिलेशनसिप के बारे में पूछा था तो 72 फीसदी से ज्यादा इसे बुराई नहीं मानते हैं. फिर भी सेक्स को लेकर समाज में खुला ध्रुवीकरण दिखता है? समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी सेक्स या शारीरिक संबंधों की बातों पर त्योरियां चढा लेता है. ऐसा क्यों इसका जवाब किसी के पास नहीं है? जहां ओशो जैसे विचारक सम्भोग से समाधि की बात कर रहें हैं वहीं कुछ लोग सेक्स को मनोविज्ञान से जोड़कर देखतें हैं, शरीर और दिल के साथ इसे दिमागी कसरत के साथ भी जोड़ कर देखा जाता है. आज भी हमारे समाज में सेक्स एक बड़ी  फंतासी है.